जयपुर । (एजेंसी) राजस्थान की राजनीति में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करते हुए राज्य सरकार ने स्थानीय लोकतंत्र से जुड़ा अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकाय चुनावों में लागू लंबे समय से विवादित ‘दो संतान’ अनिवार्यता नियम को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। यह बैठक पहली बार विधानसभा के मंत्रिमंडल कक्ष में आयोजित हुई, जिसमें कई प्रशासनिक और नीतिगत फैसलों पर मुहर लगी।
क्या था दो संतान नियम?
राजस्थान में वर्ष 2000 के बाद पंचायत एवं स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए यह शर्त लागू की गई थी कि उम्मीदवार के दो से अधिक जीवित संतान नहीं होनी चाहिए। नियम का उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना बताया गया था। हालांकि समय के साथ यह प्रावधान विवादों में रहा और हजारों जनप्रतिनिधि चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित होते रहे।
अब क्या बदला?
कैबिनेट के ताजा निर्णय के अनुसार अब पंचायत, नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम चुनावों में उम्मीदवार बनने के लिए दो संतान की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। यानी अब दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्ति भी चुनाव लड़ सकेंगे। सरकार का तर्क है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी का अधिकार सीमित नहीं होना चाहिए और यह प्रावधान सामाजिक रूप से भेदभाव पैदा कर रहा था।
क्यों लिया गया फैसला?
सरकार के अनुसार यह नियम विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए बाधा बन रहा था। कई मामलों में परिवार नियोजन से जुड़े निर्णय व्यक्तिगत या सामाजिक परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं, ऐसे में चुनावी पात्रता को इससे जोड़ना उचित नहीं माना गया।
कब से होगा लागू?
कैबिनेट की मंजूरी के बाद संबंधित कानूनों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिसूचना जारी होते ही यह नियम आगामी पंचायत और निकाय चुनावों पर लागू हो जाएगा।
राजनीतिक और सामाजिक असर
इस फैसले से प्रदेश के लाखों संभावित उम्मीदवारों के लिए राजनीति के दरवाजे खुल गए हैं। वहीं विपक्ष इसे जनसंख्या नियंत्रण नीति से पीछे हटना बता रहा है, जबकि सरकार इसे लोकतंत्र को व्यापक बनाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह निर्णय आगामी स्थानीय चुनावों की सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।
