जयपुर। राजस्थान के लाखों वाहन मालिकों को राहत देते हुए राज्य सरकार ने वाहन प्रदूषण जांच (पीयूसी) प्रमाणपत्र देर से बनवाने पर वसूली जाने वाली पेनाल्टी को समाप्त कर दिया है। परिवहन विभाग ने वर्ष 2017 से लागू इस प्रावधान को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का निर्णय लिया है। यह फैसला लंबे समय से राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित याचिका के निस्तारण के बाद लिया गया।
दरअसल, राज्य सरकार ने 4 अक्टूबर 2017 को एक आदेश जारी कर वाहन मालिकों द्वारा समय सीमा के भीतर प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र न बनवाने पर अतिरिक्त जुर्माना वसूलने का प्रावधान लागू किया था। इसके तहत दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों पर अलग-अलग श्रेणी में लेट फीस निर्धारित की गई थी। हालांकि इस नियम को कानूनी चुनौती देते हुए जयपुर निवासी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें तर्क दिया गया कि राज्य सरकार को इस प्रकार की अलग पेनाल्टी वसूलने का स्पष्ट वैधानिक अधिकार नहीं है।
मामले की सुनवाई के दौरान वर्ष 2018 में हाईकोर्ट ने उक्त प्रावधान पर रोक लगा दी थी। इसके बाद पिछले लगभग आठ वर्षों से प्रदूषण जांच में देरी पर पेनाल्टी की वसूली व्यवहारिक रूप से बंद रही। अब याचिका के अंतिम निस्तारण के पश्चात परिवहन विभाग ने 2017 की अधिसूचना को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब वाहन मालिकों से पीयूसी प्रमाणपत्र देर से नवीनीकरण कराने पर राज्य स्तर पर कोई अतिरिक्त पेनाल्टी नहीं ली जाएगी। हालांकि वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र रखना अभी भी अनिवार्य रहेगा और बिना पीयूसी वाहन चलाने पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।
सरकार के इस निर्णय को प्रशासनिक स्पष्टता और वाहन चालकों को राहत देने वाला कदम माना जा रहा है। विभाग द्वारा संबंधित सॉफ्टवेयर एवं प्रवर्तन प्रणाली में भी आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
