“सोशल मीडिया आज़ादी है, लेकिन ज़िम्मेदारी के साथ!”
नई दिल्ली |
केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही फेक न्यूज, भ्रामक जानकारी और समाज में नफरत फैलाने वाली पोस्ट्स पर लगाम कसने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने आईटी नियम-2021 में संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है, जो 15 नवंबर 2025 से पूरे देश में लागू होगी।
अब फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स (ट्विटर) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी अवैध, भ्रामक या देशविरोधी कंटेंट को नोटिस मिलने के 36 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।
सरकार के आदेश
मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सोशल मीडिया कंपनियों को अब ऐसे सभी कंटेंट पर कार्रवाई करनी होगी, जो देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा या सार्वजनिक शांति को प्रभावित करता है।
अधिसूचना के अनुसार —
“मध्यस्थ प्लेटफॉर्म को ऐसी सामग्री को हटाना होगा, जो भारतीय कानूनों का उल्लंघन करती हो या समाज में वैमनस्य, हिंसा या गलत सूचना फैलाती हो।”
कौन-सा कंटेंट हटाना होगा
- देश की एकता, अखंडता या संप्रभुता को कमजोर करने वाले संदेश
- राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेशी संबंधों को प्रभावित करने वाली सामग्री
- न्यायालय की अवमानना या मानहानि संबंधी पोस्ट
- जातीय या धार्मिक नफरत फैलाने वाले वीडियो और फोटो
- फेक न्यूज या भ्रामक जानकारी
- किसी व्यक्ति की निजता का उल्लंघन करने वाला डेटा
अब कंटेंट हटाने का आदेश केवल संयुक्त सचिव (Joint Secretary) या उससे ऊपर के अधिकारी ही जारी कर सकेंगे।
आदेश केवल लिखित या प्रमाणिक डिजिटल निर्देश के रूप में मान्य होगा।
गंभीर मामलों में पुलिस या न्यायिक अधिकारी भी हटाने का निर्देश दे सकेंगे।
सभी सोशल मीडिया कंपनियों को अपने नोडल अधिकारी और शिकायत निवारण अधिकारी की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
सरकार का कहना है कि फेक न्यूज और अफवाहों के चलते कई बार समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा होती है। इन नियमों से न केवल गलत सूचना पर रोक लगेगी, बल्कि उपयोगकर्ताओं को भी जिम्मेदारी का एहसास होगा।
मंत्रालय ने कहा —
“जनता को सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन इस अधिकार के साथ कर्तव्य भी जुड़ा है — सच साझा करें, अफवाह नहीं।”
“सोशल मीडिया पर सोच-समझकर बोलें — आपकी पोस्ट किसी की खबर बन सकती है या किसी की तकलीफ़।”
