शीर्षक: माँ सिद्धिदात्री की आराधना से पूर्ण होती हैं मनोकामनाएँ, जानें नवदुर्गा के नौवें स्वरूप की महिमा

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!! माँ सिद्धिदात्री !!

नवरात्रि के दौरान देवी सिद्धिदात्री की पूजा का नौ वाँ दिन

नाम—सिद्धिदात्री
मनपसंद फूल—रात की रानी
अर्थ— सदा सिद्धि देने वाली

मां दुर्गा के नौवें रूप की माता सिद्धिदात्री साक्षात दिव्य सिद्धियों की दाता हैं। हिमाचल के नर्मदा पर्वत पर इनका प्रसिद्ध तीर्थ मौजूद है। भागवत पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने इनकी तपस्या करके आठों सिद्धियां प्राप्त की थीं और इसी देवी की कृपा से शिव जी का आधा शरीर देवी का हुआ था इसी कारण शिव अर्धनारीश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए। देवी की इस रूप की पूजा करने से श्रद्धालुओं की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है, इस दिन श्रद्धालुगण बैंगनी रंग के कपड़े पहनते हैं और देवी को तिल का भोग चढ़ाते हैं। इस दिन कन्या पूजन और हवन करने की विशेष परंपरा हैं।

मंत्र
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नम:

महामंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नम:

बीज मंत्र
ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:

प्रार्थना
सिद्ध गंधर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥

स्तुति
ॐ या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

ध्यान
वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृत शेखराम्।
कमलस्थिताम् चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्रस्थिताम् नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शङ्ख, चक्र, गदा, पद्मधरां सिद्धीदात्री भजेम॥
पटाम्बर,परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटिं निम्ननाभि नितम्बनीम॥

स्तोत्र

  • कञ्चनाभा शङ्खचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो।
    स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते ॥
  • पटाम्बर परिधानां नानालङ्कार भूषिताम्।
    नलिस्थिताम् नलनार्क्षी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते ॥
  • परमानन्दमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
    परमशक्ति, परमभक्ति, सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते ॥
  • विश्वकर्ती, विश्वभर्ती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
    विश्व वार्चिता विश्वातीता सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
  • भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी।
    भवसागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
  • धर्मार्थकाम प्रदायिनी महामोह विनाशिनीं।
    मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥

कवच
ॐ कारः पातु शीर्षो माँ ऐं बीजम् माँ हृदयो।
हीं बीजम् सदापातु नभो, गृहो च पादयो॥
ललाट कर्णो श्रीं बीजम् पातु क्लीं बीजम् माँ नेत्रम् घ्राणो।
कपोल चिबुको हसौ पातु जगत्प्रसूत्यै माँ सर्ववदनो॥

आरती
!! ॐ श्री गणेशाय नमः !!
जय सिद्धिदात्री मां तू सिद्धि की दाता।
तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।
कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।
जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।
तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।
तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है।
रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।
तू सब काज उसके करती है पूरे।
कभी काम उसके रहे ना अधूरे।
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।
रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।
सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।
महानंदा मंदिर में है वास तेरा।
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।
भक्ति है सवालि तू जिसकी दाता।

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