जयपुर। राजधानी जयपुर में सामाजिक बहिष्कार के एक मामले ने कानूनी रूप ले लिया है। मानसरोवर निवासी जय प्रकाश बुलचंदानी की ओर से अधिवक्ता अतुल दीक्षित के माध्यम से पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत जयपुर महानगर सहित उसके पदाधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में समाज से कथित बहिष्कार संबंधी आदेश को अवैध, असंवैधानिक एवं मानहानिकारक बताया गया है।

कानूनी नोटिस के अनुसार 18 फरवरी 2026 को संस्था के लेटरहेड पर जारी एक पत्र में जय प्रकाश बुलचंदानी को सिंधी समाज से “बहिष्कृत” घोषित करते हुए समाज के लोगों को उनसे सामाजिक संबंध समाप्त करने के निर्देश दिए गए। नोटिस में आरोप लगाया गया कि यह कार्रवाई बिना किसी जांच, सूचना या प्रमाण के की गई, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुँची।
नोटिस में संस्था के पदाधिकारियों — वासुदेव देवनानी, गिरधारी लाल मनकानी, धर्मदास मोटवानी, नारायण दास हाजवानी तथा अशोक छाबड़ा को प्रतिवादी बनाया गया है।
लीगल नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि बहिष्कार पत्र में लगाए गए आरोपों — जिनमें राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संबंध में कथित आपत्तिजनक संदेश प्रसारित करने की बात कही गई — के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
अधिवक्ता की ओर से कहा गया है कि किसी भी सामाजिक संस्था या पंचायत को किसी नागरिक का सामाजिक बहिष्कार घोषित करने का अधिकार नहीं है। इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a) एवं 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है। साथ ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की मानहानि, आपराधिक धमकी एवं षड्यंत्र संबंधी धाराओं के तहत कार्रवाई योग्य अपराध बताया गया है।
नोटिस में तीन दिन के भीतर बहिष्कार आदेश वापस लेने, सार्वजनिक माफी जारी करने तथा प्रतिष्ठा हानि के एवज में ₹50 लाख का मुआवजा देने की मांग की गई है। निर्धारित समय सीमा में पालन नहीं होने पर दीवानी व आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने तथा एफआईआर करवाने की चेतावनी दी गई है।
सूत्र: अधिवक्ता द्वारा जारी विधिक नोटिस दिनांक 20 फरवरी 2026।


स्त्रोत : जयप्रकाश बुलचंदानी
