खबर वन न्यूज | जयपुर | 26 अक्टूबर 2026
राजस्थान में मानसून की कमी और खरीफ फसलों को हुए नुकसान के बीच राज्य सरकार ने 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें 69 तहसीलों को गंभीर और 11 को मध्यम सूखा प्रभावित श्रेणी में रखा गया है। आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग की 24 और 25 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचनाओं के आधार पर यह घोषणा की गई है।
यह फैसला उन क्षेत्रों के किसानों और पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां कम बारिश, पानी की घटती उपलब्धता और फसलों की खराब स्थिति ने चिंता बढ़ाई है। अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत, चारे और पानी की व्यवस्था किस तरह लागू होगी।
किन जिलों की तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित हुईं?
सरकारी अधिसूचनाओं की रिपोर्ट के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में ये 14 जिले शामिल हैं:
* जोधपुर: 12 तहसीलें
* बाड़मेर और जालोर: 10-10 तहसीलें
* बालोतरा: 9 तहसीलें
* पाली: 8 तहसीलें
* डूंगरपुर, जैसलमेर और फलोदी: 7-7 तहसीलें
* बांसवाड़ा: 3 तहसीलें
* ब्यावर और चूरू: 2-2 तहसीलें
* बीकानेर, नागौर और सिरोही: एक-एक तहसील
जोधपुर में सबसे अधिक तहसीलें प्रभावित श्रेणी में हैं। बाड़मेर और जालोर की सभी अधिसूचित तहसीलों को गंभीर सूखा प्रभावित श्रेणी में रखा गया है।
सूखे का आकलन किन आधारों पर हुआ?
तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए वर्षा की कमी, सतही और भूजल की उपलब्धता, फसलों की स्थिति तथा राष्ट्रीय सूखा निगरानी पोर्टल से प्राप्त जानकारी जैसे मानकों पर विचार किया गया। आकलन में केंद्र सरकार के Drought Management Manual, 2016 का अनुसरण किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
जल संसाधन विभाग की 30 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में 1 जून से 30 सितंबर के बीच 350.83 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 424.71 मिलीमीटर थी। यानी सामान्य से 73.88 मिलीमीटर कम वर्षा दर्ज की गई। राज्य के 693 निगरानी वाले बांधों में कुल क्षमता का 62.16 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी तारीख पर यह 90.19 प्रतिशत था।
छह महीने तक प्रभावी रहेगी घोषणा
विभागीय अधिसूचनाओं के अनुसार, सूखाग्रस्त घोषित क्षेत्रों के लिए संबंधित प्रावधान अधिसूचना के प्रकाशन से छह महीने तक प्रभावी रहेंगे। यह अवधि प्रभावित क्षेत्रों में सूखा प्रबंधन और राहत संबंधी कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण है।
किसानों को अब किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
सूखाग्रस्त घोषित होने का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक किसान को स्वतः निश्चित राशि का मुआवजा मिल जाएगा। सहायता का लाभ संबंधित योजना, पात्रता, फसल नुकसान के आकलन और लागू सरकारी दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगा।
प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को चाहिए कि वे:
*अपनी फसल के नुकसान का विवरण और उपलब्ध प्रमाण सुरक्षित रखें।
* गिरदावरी या फसल नुकसान के सर्वेक्षण संबंधी जानकारी स्थानीय पटवारी और कृषि विभाग से लें।
* फसल बीमा कराया है तो संबंधित बीमा कंपनी और कृषि विभाग से दावा प्रक्रिया की जानकारी लें।
* मुआवजे या कृषि इनपुट सहायता की पात्रता के लिए जिला प्रशासन की आधिकारिक घोषणा देखें।
* पशुपालक चारा डिपो, पानी की व्यवस्था और संबंधित सहायता की जानकारी स्थानीय प्रशासन से प्राप्त करें।
सरकार के सामने अब राहत पहुंचाने की चुनौती
सूखाग्रस्त घोषणा के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना है। किसानों को फसल नुकसान के आकलन, पात्रता और सहायता वितरण की स्पष्ट जानकारी समय पर मिलनी चाहिए। पशुपालकों के लिए चारे और पानी की उपलब्धता भी अहम होगी।
सूखाग्रस्त घोषित प्रत्येक तहसील में सर्वेक्षण कब पूरा होगा, पात्र किसानों को किस योजना के तहत सहायता मिलेगी और राहत वितरण की समय-सीमा क्या होगी? इन सवालों पर संबंधित विभागों की अगली घोषणाएं प्रभावित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।
