कोलकाता/राष्ट्रीय ब्यूरो। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान हुई भगदड़ ने उत्सव को मातम में बदल दिया। उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 की शाम अचानक भीड़ बढ़ने से अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। रविवार को सामने आई पुलिस संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
बारिश, भीड़ और माइक से हुई घोषणा बनी जांच का केंद्र
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पंडाल के आसपास अचानक तेज बारिश होने पर बड़ी संख्या में लोग बचने के लिए अंदर की ओर बढ़े। इसी दौरान प्रवेश और निकास मार्गों पर भीड़ का दबाव बढ़ गया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि पंडाल की संरचना गिरने की आशंका जताते हुए लाउडस्पीकर पर की गई घोषणा से लोगों में घबराहट तो नहीं फैली। संकरे रास्ते और भीड़ नियंत्रण की कथित कमियां भी जांच के दायरे में हैं। हालांकि, हादसे के सभी कारणों और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही होगा।
सात गिरफ्तार, विशेष जांच दल करेगा पड़ताल
पुलिस ने पूजा समिति के पदाधिकारियों, पंडाल निर्माण से जुड़े व्यक्ति और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित लोगों सहित सात व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 110 और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज किए जाने की खबर है। आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है और गिरफ्तार व्यक्तियों को दोषी ठहराया जाना जांच तथा न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा।
पश्चिम बंगाल सरकार ने घटना की जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की घोषणा की है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और प्रवेश-निकास व्यवस्था की पड़ताल की जाएगी।
प्रशासन की कार्रवाई और मुआवजे की घोषणा
घटना के बाद पंडाल को बंद कर जांच एजेंसियों को निरीक्षण का अवसर दिया गया। आकाशवाणी की 18 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को ग्रुप-डी सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। घायलों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार किया जा रहा है।
भीड़ प्रबंधन पर सवाल
यह हादसा धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, पर्याप्त पुलिस बल, सुरक्षित निकास मार्ग और आपातकालीन घोषणाओं की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि आयोजन की सुरक्षा योजना क्या थी, उपलब्ध रास्ते भीड़ के अनुपात में पर्याप्त थे या नहीं और संकट के समय प्रशासन तथा आयोजकों ने क्या कदम उठाए।
जब बड़े धार्मिक आयोजनों में हजारों लोग जुटते हैं, तो क्या प्रवेश और निकास मार्ग, आपातकालीन निकासी योजना तथा प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है? इस हादसे की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
