खबर वन न्यूज | राष्ट्रीय सुरक्षा | 16 अक्टूबर
बैंकिंग से लेकर सरकारी नेटवर्क तक मंडराता खतरा AI एजेंटों की अनधिकृत पहुंच और वित्तीय लेनदेन में सेंध के मामले सामने आए
नई दिल्ली। (एजेंसी) भारत की डिजिटल सुरक्षा के सामने साइबर हमलों का बदलता स्वरूप नई चुनौती बनकर उभरा है। अब खतरा केवल फर्जी लिंक, पासवर्ड चोरी या बैंकिंग धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित एजेंट भी डिजिटल प्रणालियों की कमजोरियों का फायदा उठाकर अनधिकृत पहुंच बनाने में सक्षम दिखाई दिए हैं। भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) ने 15 अक्टूबर 2026 को AI एजेंटों के जरिए भारतीय सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्रणालियों को निशाना बनाए जाने पर गंभीर चेतावनी जारी की है ।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाएं और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं इंटरनेट आधारित प्रणालियों पर तेजी से निर्भर हो रही हैं। साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विभाग का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिकों के निजी डेटा की रक्षा से जुड़ा है।
सरकार द्वारा अगस्त में जारी जानकारी के मुताबिक, CERT-In ने वर्ष 2023 में 15,92,917, वर्ष 2024 में 20,41,360 और वर्ष 2025 में 29,44,248 साइबर सुरक्षा घटनाएं दर्ज कीं। ये आंकड़े रिपोर्ट की गई और ट्रैक की गई घटनाओं के हैं ।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल जब AI एजेंटों की अनधिकृत पहुंच का पता संबंधित संस्थाओं को स्वयं नहीं चला, तो क्या सरकारी और निजी संस्थाओं में वास्तविक निगरानी, नियमित सुरक्षा परीक्षण और जवाबदेही को और मजबूत करने की जरूरत नहीं है?
वर्तमान में भारत के पास साइबर हमलों से निपटने के लिए संस्थागत ढांचा, तकनीकी निगरानी, सुरक्षा अभ्यास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मौजूद हैं। लेकिन 15 अक्टूबर की CERT-In चेतावनी के बाद सबसे बड़ी चुनौती —AI से बढ़ते खतरे से बचने के लिए डिजिटल सुरक्षा को तेज करना, तत्काल डिजिटल क्राइम पर नकेल कसने के लिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई को अंजाम देने की ओर भारत को तेजी से काम करना होगा ।
