!! माँ चंद्रघंटा !!नवरात्रि का तीसरा दिन: माँ चंद्रघंटा की आराधना से साहस, शांति और शक्ति का संदेश

!! माँ चंद्रघंटा !!

नवरात्रि के दौरान देवी चंद्रघंटा की पूजा का तीसरा दिन

नवरात्रि के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाती है माता चंद्रघंटा को वीरता की देवी माना जाता है ऐसा माना जाता है की देवी की इस रूप की पूजा करने से आपके सारे कष्ट मिट जाते हैं और आपकी मनोकामना पूरी होती है इस दिन श्रद्धालु भूरे रंग का वस्त्र पहनते हैं और देवी को दूध या खीर का भोग चढ़ाते हैं।

नाम— चंद्रघंटा
मनपसंद फूल— चमेली
अर्थ— चांद की तरह चमकने वाली

मंत्र—
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

प्रार्थना—
पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

स्तुति—
ॐ या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान—
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चन्द्रघण्टा यशस्विनीम्॥
मणिपुर स्थिताम् तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खङ्ग, गदा, त्रिशूल, चापशर, पद्म कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्॥
मञ्जीर हार केयूर, किंड्•किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कामनीयां लावण्यां क्षीणकटिं नितम्बिनीम्।

स्तोत्र—
आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।
अणिमादि सिद्धिदात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम्।
धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाम्यहम्॥
नानारूपधारिणी इच्छामयी ऐश्वर्यदायनीम्।
सौभाग्यारोग्यदायिनी चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥

कवच—
रहस्यं शृणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।
श्री चन्द्रघण्टास्य कवचं सर्वसिद्धि दायकम्॥
बिना न्यासम् बिना विनियोगम् बिना शापोद्धा बिना होमम्।
स्नानम् शौचादि नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिदाम॥
कुशिष्याम कुटिलाय वञ्चकाय निन्दकाय च।
न दातव्यम् न दातव्यम् न दातव्यम् कदाचितम्॥

आरती—

!!ॐ श्री गणेशाय नमः!!

जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे काम॥
चन्द्र समान तू शीतल दाती।
चन्द्र तेज किरणों में समाती॥
क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली॥
मन की मालक मन भाती हो।
चन्द्रघण्टा तुम वर दाती हो॥
सुन्दर भाव को लाने वाली।
हर संकट में बचाने वाली॥
हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाये॥
मूर्ति चन्द्र आकार बनाये।
सन्मुख घी की ज्योत जलाये॥
शीश झुका कहे मन की बात।
पूर्ण आस करो जगत दाता॥
कांचीपुर स्थान तुम्हारा।
कर्नाटिका मे मान तुम्हारा॥
नाम तेरा रटु महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी॥

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