आज फिर वही दिन लौट आया है…वही अक्टूबर, वही शनिवार और वही अष्टमी की तिथि…

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“चिराग बुझते नहीं… वे अपनी रोशनी छोड़ जाते हैं, जो अंधेरे में भी राह दिखाती रहती है।”


7 अक्टूबर 2023 की वो रात जब अजमेर की पुष्कर घाटी में हुए उस दर्दनाक हादसे ने हमसे हमारे अपने चिराग़ चीनू जी को हमेशा के लिए छीन लिया था। वही अक्टूबर, वही शनिवार और वही अष्टमी की तिथि आज है ।

वक्त गुजरता रहा, लेकिन उस दिन की टीस आज भी वैसी ही है। जब वही तिथि और वही शनिवार आता है, तो उस मनहूस दिन की यादें फिर से आंखों के सामने जीवंत हो उठती हैं।

चीनू जी, आप हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आपकी यादें आज भी हमारे दिलों में एक चिराग की तरह जल रही हैं। आपकी स्मृतियों की यह रोशनी कभी कम न हो और आपके स्नेह की गर्माहट हमेशा आपके परिवार के साथ बनी रहे।

आप जहां भी हों, सदा खुश रहें। ईश्वर आपकी आत्मा को शांति प्रदान करें और अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
आपका स्नेह, आपका आशीर्वाद और आपकी यादें हमेशा आपके परिवार के जीवन को रोशन करती रहें।

आपकी कमी कभी पूरी नहीं होगी…
लेकिन आपकी यादों का चिराग हमेशा जलता रहेगा।

भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
ॐ शांति। 🙏🕯️
रंजिता सक्सैना (चाची) एवं समस्त परिजन

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