नई दिल्ली/जयपुर/अजमेर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का विरोध 28 सितंबर को दिल्ली समेत कई राज्यों में देखने को मिला ,जबकि 29 सितंबर को राजस्थान के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन जारी रहे। दिल्ली में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जयपुर में बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के दौरान वाटर कैनन चलाया गया और अजमेर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका।
दिल्ली में मार्च निकला
28 सितंबर को दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजीव भवन से निर्वाचन सदन की ओर मार्च किया। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च रोका और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। कांग्रेस ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की।
जयपुर में वाटर कैनन
उसी दिन जयपुर में शहीद स्मारक से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर कांग्रेस का मार्च निकला। बैरिकेड पार करने की कोशिश के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।
अजमेर में पुतला फूंका
29 सितंबर को अजमेर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका। कार्यकर्ताओं ने उनके इस्तीफे और पद से हटाने की मांग की। उपलब्ध स्थानीय विवरण में पुतला दहन और प्रदर्शन की पुष्टि है; अजमेर में बड़े स्तर की पुलिस झड़प या गिरफ्तारी की स्वतंत्र पुष्टि स्पष्ट नहीं है।
अन्य राज्यों में भी प्रदर्शन
28 सितंबर को उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मार्च, धरना और पुतला दहन किया। आगरा में ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास के बाहर प्रदर्शन हुआ। कुछ स्थानों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और पुलिस-कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक की घटनाएं सामने आईं।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की है ।
फिलहाल कांग्रेस की ओर से देश भर में उनके इस्तीफे और पद से हटाने की मांग को लेकर आंदोलन किया जा रहा है।
सरकार और आयोग के सामने चुनौती
दिल्ली से जयपुर और अजमेर तक हुए प्रदर्शनों ने SIR और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है। ऐसे में सरकार और चुनाव आयोग के सामने चुनौती आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर मतदाता सूची में बदलाव, SIR की प्रक्रिया और दावों-आपत्तियों के निस्तारण से जुड़े रिकॉर्ड को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की विश्वसनीयता सबसे अहम है। इसलिए उठ रहे सवालों का जवाब पारदर्शी प्रक्रिया और प्रमाणित आंकड़ों के जरिए देना ही विवाद को शांत करने का सबसे प्रभावी रास्ता हो सकता है।
