बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौतों पर अभिजीत दीपके का सरकार पर हमला, बड़े आंदोलन की चेतावनी

Spread the love

गांवों का दौरा कर जमीनी हालात जानेंगे CJP फाउंडर; स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण और पेयजल व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

बालाघाट। आदिवासी बच्चों की मौतों को लेकर बालाघाट में सियासी और सामाजिक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके शनिवार को बालाघाट पहुंचे और उन गांवों का दौरा करने की बात कही, जहां पिछले कुछ महीनों के दौरान आदिवासी बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं।बालाघाट पहुंचने के बाद दीपके ने आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि कई क्षेत्रों में बच्चों को बुनियादी चिकित्सा सुविधा, नियमित टीकाकरण और सुरक्षित पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएं तक पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।उन्होंने दावा किया कि हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को मजबूरी में झीरिया के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। दीपके ने कहा कि आदिवासी परिवारों की समस्याओं को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया, जिसका असर सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ रहा है।

मंत्री और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग

अभिजीत दीपके ने आदिवासी विकास विभाग और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार मंत्रियों तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदिवासी बच्चों की मौतों और गांवों में व्याप्त बुनियादी समस्याओं को लेकर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो CJP बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएगी।दीपके ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके साथ खड़े होकर उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समुदाय की समस्याओं को लेकर उनकी पार्टी आगे भी आवाज उठाती रहेगी।

बालाघाट में युवाओं के बीच दिखा उत्साह

बालाघाट पहुंचने के दौरान दीपके के साथ तस्वीर लेने के लिए युवाओं में भी उत्साह दिखाई दिया। इसी दौरान एक बच्चे ने उनसे ऑटोग्राफ मांगा। दीपके ने बच्चे का नाम पूछा और उसके हाथ पर ऑटोग्राफ दिया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। आदिवासी बच्चों की मौत, स्वास्थ्य सुविधाओं और पेयजल व्यवस्था को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। संबंधित विभागों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *