जब पेड़ बने भाई… महिला वनकर्मियों ने जंगल में बांधी राखी, लिया जीवनभर रक्षा का संकल्प

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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अनोखे अंदाज में मनाया रक्षाबंधन, तिलक-आरती के बाद वृक्षों की कलाई पर सजा रक्षा सूत्र; प्रकृति संरक्षण का दिया भावुक संदेश

उमरिया। रक्षाबंधन का पर्व आमतौर पर भाई-बहन के अटूट रिश्ते और रक्षा के संकल्प के लिए जाना जाता है, लेकिन बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इस बार रक्षाबंधन ने एक ऐसा संदेश दिया, जिसने पर्व के मायने ही प्रकृति और पर्यावरण से जोड़ दिए। जंगल की सुरक्षा में दिन-रात जुटी महिला वनकर्मियों ने इस बार इंसानों को नहीं, बल्कि पेड़ों को अपना भाई मानकर उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। तिलक, आरती और पूजा के साथ मनाया गया यह अनूठा रक्षाबंधन जंगल के बीच प्रकृति के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भाव जगाता नजर आया।सुबह महिला वनरक्षक पूजा की थाली लेकर जंगल पहुंचीं। वहां पहले से चयनित वृक्षों के पास विधि-विधान से पूजा की गई। पेड़ों को तिलक लगाया गया, आरती उतारी गई और उनकी शाखाओं पर रक्षा सूत्र बांधा गया। इसके बाद वनकर्मियों ने संकल्प लिया कि जिस जंगल और वृक्षों ने सदियों से मनुष्य और वन्यजीवों को जीवन दिया है, उनकी रक्षा के लिए वे पूरी जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ अपना कर्तव्य निभाती रहेंगी।

पेड़ ही तो हैं जंगल के असली रक्षक

महिला वनकर्मियों का कहना था कि जंगल में खड़े वृक्ष केवल हरियाली का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन और वन्यजीवों के अस्तित्व का आधार हैं। पेड़ हवा, पानी, मिट्टी और जैव विविधता को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उन्हें भाई मानकर राखी बांधना महज एक रस्म नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ अपने रिश्ते को स्वीकार करने का प्रतीक है।रक्षाबंधन के इस आयोजन के जरिए वनकर्मियों ने संदेश दिया कि जिस तरह भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है, उसी तरह समाज को भी पेड़ों और जंगलों की रक्षा का संकल्प लेना होगा।

‘वृक्ष बड़े भाई की तरह करते हैं रक्षा’

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने महिला वनकर्मियों की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि वृक्ष बड़े भाई की तरह जीवनभर मनुष्य और संपूर्ण मानव जाति की रक्षा करते हैं। ऐसे में पेड़ों को राखी बांधने की पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल है।

राखी के साथ लिया जंगल बचाने का संकल्प

इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल पेड़ों को राखी बांधना नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपा जिम्मेदारी का संकल्प रहा। महिला वनकर्मियों ने वृक्षों की सुरक्षा, अवैध कटाई रोकने और पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम करने का संकल्प दोहराया।बांधवगढ़ के जंगलों में मनाया गया यह रक्षाबंधन इसलिए खास बन गया क्योंकि यहां रक्षा का रिश्ता सिर्फ भाई-बहन के बीच नहीं रहा, बल्कि इंसान और प्रकृति के बीच भी दिखाई दिया।एक तरफ राखी की डोर थी और दूसरी तरफ जंगल के वृक्ष—मानो यह संदेश दे रहे हों कि अगर पेड़ हमारी सांसों और जीवन की रक्षा करते हैं, तो अब उनकी रक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है।यह रक्षाबंधन सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश बनकर सामने आया—पेड़ बचेंगे, जंगल बचेंगे, तभी जीवन बचेगा।

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