
एयरपोर्ट से संभाग के अफसरों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश, बाढ़ नुकसान के तकनीकी सर्वे से लेकर फसल क्षति और राहत राशि तक तत्काल कार्रवाई के आदेश
रीवा। लगातार बारिश और बाढ़ से जूझ रहे रीवा में रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दौरा महज औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहा। रीवा एयरपोर्ट पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रीवा और शहडोल संभाग के अधिकारियों से सीधे बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया और इसके बाद स्वयं जलभराव से प्रभावित गुलाब नगर पहुंचे। यहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी परेशानी सुनी और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरतने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि आपदा की इस घड़ी में सरकार और प्रशासन जनता के साथ खड़ा है। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जिन इलाकों में अभी भी बाढ़ का पानी मौजूद है, वहां तत्काल राहत शिविर संचालित किए जाएं। इन शिविरों में प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सुविधा की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
एयरपोर्ट से ही संभाग के अधिकारियों की ली क्लास
मुख्यमंत्री ने रीवा एयरपोर्ट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रीवा एवं शहडोल संभाग के कमिश्नरों तथा संबंधित जिलों के कलेक्टरों से बाढ़ की स्थिति पर सीधी चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जनहानि और पशुहानि रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।मुख्यमंत्री ने बाढ़ से हुए नुकसान का वास्तविक आकलन कराने के लिए तकनीकी सर्वे दल गठित करने के निर्देश दिए। फसल क्षति वाले क्षेत्रों में भी प्राथमिकता के आधार पर सर्वे कराने और पात्र प्रभावित किसानों को जल्द राहत उपलब्ध कराने को कहा गया।कच्चे और क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे पटवारियों के माध्यम से कराने तथा जिन परिवारों के घर, सामान अथवा खाद्यान्न को नुकसान पहुंचा है, उन्हें नियमानुसार आरबीसी 6/4 के तहत सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
गुलाब नगर पहुंचे तो सामने थी बाढ़ की जमीनी तस्वीर
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समाप्त करने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सीधे रीवा के गुलाब नगर पहुंचे। जलभराव से प्रभावित लोगों के बीच पहुंचकर उन्होंने उनकी परेशानियां सुनीं और हरसंभव सहायता का भरोसा दिया।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से मौके की स्थिति की जानकारी लेते हुए कहा कि बाढ़ से हुई क्षति का तत्काल सर्वे कराया जाए और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने में किसी तरह की देरी न हो।गुलाब नगर की जलभराव की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री ने आचार्य नगर से फूलमती नाले होते हुए अमहिया नाले तक नाला निर्माण की घोषणा की। माना जा रहा है कि प्रस्तावित नाला निर्माण से शहर के बड़े हिस्से में बारिश और बाढ़ के पानी की निकासी को बेहतर रास्ता मिल सकेगा।
सिर्फ राहत नहीं, बीमारी रोकने की भी तैयारी
मुख्यमंत्री ने बाढ़ का पानी उतरने के बाद पैदा होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को लेकर भी अधिकारियों को पहले से सतर्क किया। जिन क्षेत्रों में बाढ़ का पानी उतर चुका है, वहां सरकारी अमले को भेजकर भोजन और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए गए।सभी जलस्रोतों और हैंडपंपों में क्लोरीनेशन तथा ब्लीचिंग पाउडर डालने, बाढ़ प्रभावित गांवों और शहरी वार्डों में विशेष चिकित्सा शिविर लगाने और लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराने को कहा गया।मुख्यमंत्री ने बुखार, सर्दी-जुकाम सहित सामान्य दिखने वाली बीमारियों को भी गंभीरता से लेने की हिदायत दी, ताकि बाढ़ के बाद किसी संक्रामक बीमारी को पैर पसारने का मौका न मिले। सर्पदंश की घटनाओं से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए गए।
बिजली, पशुधन और गौशालाओं पर भी नजर
अति वर्षा के कारण जिन गांवों में विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई है, वहां बिजली व्यवस्था तत्काल बहाल करने के निर्देश विद्युत विभाग को दिए गए। पशु चिकित्सा विभाग को बाढ़ग्रस्त इलाकों में पशुओं के उपचार को प्राथमिकता देने और मृत पशुओं का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया।गौशालाओं में चारे और पानी की पर्याप्त व्यवस्था रखने तथा जहां शुरुआती अवस्था में बोई गई फसल बर्बाद हुई है, वहां किसानों के लिए आवश्यक बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए।
सीधी में सड़क बहने की घटना पर तकनीकी जांच के आदेश
अति वर्षा के बीच सीधी जिले में नवनिर्मित सड़क के बह जाने की घटना को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया। उन्होंने रीवा संभाग के कमिश्नर को निर्देश दिए कि तकनीकी टीम गठित कर सड़क बहने के कारणों की जांच कराई जाए और रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
मुख्यमंत्री का संदेश साफ—मैदान में दिखे प्रशासन
मुख्यमंत्री ने राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा और कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग अपने दल बनाकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचें और राहत एवं बचाव कार्य में जुटें।नगरीय निकायों से लेकर गांवों तक विशेष साफ-सफाई अभियान चलाने का निर्देश भी दिया गया, ताकि बाढ़ और बारिश के बाद गंदगी के कारण संक्रमण और बीमारियों का खतरा न बढ़े।मुख्यमंत्री ने किसानों को भविष्य में कम पानी वाली फसलों की ओर प्रेरित करने की बात भी कही, ताकि अत्यधिक बारिश और जलभराव जैसी परिस्थितियों में फसल नुकसान का जोखिम कम किया जा सके।रीवा में मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे वक्त हुआ है, जब बाढ़ ने शहर से लेकर गांव तक प्रशासनिक व्यवस्थाओं की परीक्षा ले रखी है। गुलाब नगर में प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर मुख्यमंत्री ने जहां तत्काल राहत का भरोसा दिया, वहीं एयरपोर्ट से अधिकारियों को दिए निर्देशों में यह संदेश भी साफ रहा कि अब बाढ़ राहत का काम सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए।इस दौरान उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, विधायक सिरमौर दिव्यराज सिंह, विधायक त्योंथर सिद्धार्थ तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह, आईजी गौरव राजपूत, डीआईजी हेमंत सिंह चौहान, कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी, एसपी डॉ. गुरूकरण सिंह, नगर निगम आयुक्त अक्षत जैन सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
