नई दिल्ली/भुवनेश्वर: देश भर के शहरों में स्वच्छता कर्मियों की कार्यस्थल पर होने वाली मौतों पर पूर्ण रोक लगाने और सुरक्षित, तकनीक-संचालित व्यवस्था बनाने के उद्देश्य से ओडिशा के भुवनेश्वर में ‘मिशन ज़ीरो’ राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप स्वच्छता कार्य में शून्य मृत्यु दर हासिल करना एक सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता है। उन्होंने सुरक्षित, व्यवस्थित और सम्मानजनक स्वच्छता सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए ‘संपूर्ण सरकार’ (होल ऑफ गवर्नमेंट) दृष्टिकोण पर जोर दिया।
मशीनीकरण और सामाजिक सुरक्षा पर जोर
कार्यशाला में हाथों से मैला उठाने या खतरनाक सफाई प्रथाओं को समाप्त कर स्वच्छता सेवाओं के पूर्ण मशीनीकरण पर विशेष बल दिया गया:
- ‘नमस्ते’ और ‘गरिमा’ योजनाएं: सफाई कर्मचारियों और उनके आश्रितों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका सुनिश्चित करने के लिए इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।
- संस्थागत तंत्र की मजबूती: शहरी स्थानीय निकायों (ULBs), नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर आपातकालीन परिचालन तैयारियों को पुख्ता किया जा रहा है।
- श्रमिक कल्याण: स्वच्छता कर्मियों को आधुनिक सुरक्षा उपकरण, नियमित प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा कवरेज उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
इस कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों, नगर निगम आयुक्तों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी हितधारकों ने साझा संकल्प व्यक्त किया कि देश में एक ऐसा टिकाऊ और मानवीय स्वच्छता इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा, जहां किसी भी सफाई कर्मचारी को अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।
