
छह माह पहले बनी सड़क पहली बड़ी बारिश में ही सवालों के घेरे में, रामपुर नैकिन में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त—कुढ़ेरी नाला उफान पर, 10 पंचायतों के संपर्क प्रभावित होने की खबर
छह माह पहले बनी सड़क पहली बड़ी बारिश में ही सवालों के घेरे में, रामपुर नैकिन में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त—कुढ़ेरी नाला उफान पर, 10 पंचायतों के संपर्क प्रभावित होने की खबरसीधी। जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने रामपुर नैकिन क्षेत्र में सड़क, आवागमन और जनजीवन की पूरी व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। बारिश के पानी के तेज बहाव ने खैरा-डिठौरा मार्ग पर करीब 104 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई नई सड़क के बड़े हिस्से को काटकर बहा दिया। हैरानी की बात यह है कि सड़क को बने अभी लगभग छह महीने ही हुए बताए जा रहे हैं। पहली ही बड़ी बारिश में सड़क के इस तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।बताया जा रहा है कि खैरा-डिठौरा मार्ग पर बारिश के पानी की निकासी के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। लगातार बारिश के बाद जब पानी का दबाव बढ़ा तो तेज बहाव सड़क के हिस्से को अपने साथ बहा ले गया। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सड़क का इस तरह क्षतिग्रस्त होना न केवल सरकारी निर्माण व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि बारिश के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को लेकर भी बड़ी चिंता पैदा करता है।
रामपुर नैकिन बाजार भी पानी-पानी
लगातार बारिश का असर रामपुर नैकिन बाजार में भी साफ दिखाई दिया। अस्पताल चौराहा, हनुमान मंदिर चौराहा और पुरानी बाजार सहित कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी रही। सड़कों पर पानी जमा होने से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा तथा यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई।
कुढ़ेरी नाला उफान पर, 10 पंचायतों का संपर्क प्रभावित होने की खबर
बारिश का असर केवल रामपुर नैकिन तक सीमित नहीं है। कुढ़ेरी नाला उफान पर आने के बाद सिहावल क्षेत्र की करीब 10 पंचायतों का मुख्य मार्ग से संपर्क प्रभावित होने की खबर है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन के साथ-साथ जरूरी सेवाओं तक पहुंच को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
बारिश ने खोल दी सड़क निर्माण और जल निकासी व्यवस्था की पोल?
एक ओर जहां प्रशासन लगातार बारिश और संभावित आपदा से निपटने के लिए तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर छह महीने पहले बनी बताई जा रही 104 करोड़ रुपये की सड़क का पहली बड़ी बारिश में क्षतिग्रस्त होना व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। आखिर इतनी बड़ी लागत से बनी सड़क में जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं थी? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की ठीक से जांच हुई थी? और यदि सड़क निर्माण में कोई कमी थी तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?फिलहाल बारिश का दौर जारी है और ऐसे में सीधी जिले के कई ग्रामीण इलाकों में सड़क एवं संपर्क व्यवस्था पर संकट गहराता दिखाई दे रहा है। जरूरत इस बात की है कि क्षतिग्रस्त मार्गों पर तत्काल राहत और आवागमन बहाली के साथ-साथ करोड़ों रुपये की लागत वाली सड़क के क्षतिग्रस्त होने के कारणों की तकनीकी जांच भी कराई जाए, ताकि सरकारी धन से बने निर्माण कार्यों की वास्तविक गुणवत्ता सामने आ सके।
