रायपुर। रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने चेक-इन बैग खोने के मामले में इंडिगो एयरलाइन को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया है। आयोग ने एयरलाइन को दो यात्रियों को कुल 70 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। इसमें खोए सामान के लिए 50 हजार रुपये, मानसिक परेशानी के लिए 15 हजार रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 5 हजार रुपये शामिल हैं।
आयोग की अध्यक्ष दाकेश्वर प्रसाद शर्मा तथा सदस्य निरुपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री की पीठ ने 28 जुलाई को जारी आदेश में एयरलाइन को 45 दिनों के भीतर निर्धारित राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया।
पावर बैंक के कारण शुरू हुआ मामला
मामला 26 जनवरी 2019 का है। दो यात्री इंडिगो की उड़ान से बेंगलुरु से रायपुर आ रहे थे। बेंगलुरु हवाई अड्डे पर जांच के दौरान उनके एक चेक-इन बैग में पावर बैंक पाया गया। यात्रियों की सहमति से एयरलाइन कर्मचारियों ने पावर बैंक को बैग से निकाल दिया।
हालांकि, इसके बाद यात्रियों का बैग रायपुर जाने वाली उड़ान में लोड नहीं किया गया। रायपुर पहुंचने पर यात्रियों को अपना सामान नहीं मिला। उन्होंने एयरलाइन से कई बार संपर्क किया, लेकिन सामान का कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद यात्रियों ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
एयरलाइन ने क्या दी दलील?
इंडिगो ने आयोग के समक्ष तर्क दिया कि यात्री प्रतिबंधित वस्तुओं से संबंधित नियमों से परिचित थे और उन्होंने बैग में पावर बैंक रखा था। एयरलाइन ने यह भी कहा कि उसके कर्मचारियों ने सामान तलाशने का प्रयास किया था और यात्रियों ने रायपुर हवाई अड्डे पर प्रॉपर्टी इरेगुलैरिटी रिपोर्ट (PIR) दर्ज नहीं कराई।
एयरलाइन ने अपनी लगेज नीति का हवाला देते हुए यह भी दावा किया कि उसकी देनदारी 350 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से अधिकतम 20 हजार रुपये तक सीमित है।
टैग जारी होने के बाद एयरलाइन की जिम्मेदारी
उपभोक्ता आयोग ने एयरलाइन की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने माना कि पावर बैंक को बैग से निकाल दिए जाने के बाद एयरलाइन की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। एक बार प्रतिबंधित वस्तु हटा दिए जाने के बाद यात्रियों के शेष सामान को सुरक्षित रूप से गंतव्य तक पहुंचाना एयरलाइन की जिम्मेदारी थी।
आयोग ने स्पष्ट किया कि एक बार चेक-इन बैगेज का टैग जारी हो जाने के बाद उसकी सुरक्षा और सुरक्षित डिलीवरी की जिम्मेदारी एयरलाइन की होती है। एयरलाइन केवल अपनी लगेज नीति का हवाला देकर मुआवजे की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती, विशेषकर तब जब संबंधित शर्तों की जानकारी यात्री को स्पष्ट रूप से नहीं दी गई हो।
70 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश
आयोग ने एयरलाइन को दोनों यात्रियों को कुल 70,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसमें:
- 50,000 रुपये — खोए सामान के लिए मुआवजा
- 15,000 रुपये — मानसिक परेशानी के लिए
- 5,000 रुपये — मुकदमेबाजी के खर्च के लिए
शामिल हैं। आयोग ने एयरलाइन को आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
