अजमेर : निंबार्क पीठ द्वारा संचालित मार्केट में जन-सुविधाओं की अनदेखी

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अजमेर स्थित खाईलैंड मार्केट के सामने बने निंबार्क मंदिर के नीचे परिसर जो कि निंबार्क पीठ द्वारा संचालित बताया जाता है, आज अव्यवस्थाओं और लापरवाही के कारण परिसर के नीचे बने बाजार में संस्था ने दर्जनों दुकानें किराए पर तो दे दी , जहां दिनभर ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है। लेकिन इतने व्यस्त व्यावसायिक परिसर में मूलभूत जन-सुविधाओं की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।

संस्था द्वारा बेसमेंट में शौचालय और मूत्रालय का निर्माण करवा गया था , लेकिन वर्तमान में उनकी हालत इतनी खराब है कि वे उपयोग के योग्य नहीं रहे। बदबू, गंदगी, पान-गुटखा की पीक और लंबे समय से सफाई के अभाव के कारण ये शौचालय अब जर्जर हालत में बंद पड़े हैं। न तो नियमित सफाई होती है और न ही इनके रख-रखाव की कोई व्यवस्था दिखाई देती है।

इसका सीधा असर स्थानीय दुकानदारों और कर्मचारियों पर पड़ रहा है। मजबूरी में उन्हें गंदगी के बीच लघुशंका के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है, जो न केवल अस्वास्थ्यकर है बल्कि मानवीय गरिमा के भी खिलाफ है। ग्राहकों और आमजन के लिए भी यह स्थिति असहज और शर्मनाक है।

यह सवाल स्वाभाविक है कि जब ट्रस्ट और संस्थाएं अपने परिसरों को व्यावसायिक उपयोग के लिए किराए पर देती हैं और उससे नियमित आय प्राप्त करती हैं, तो जन-सुविधाओं की जिम्मेदारी से वे कैसे बच सकती हैं? धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से तो अपेक्षा की जाती है कि वे स्वच्छता, स्वास्थ्य और जनहित के मामलों में उदाहरण प्रस्तुत करें, न कि लापरवाही बरतें।

इस मामले में केवल संस्था ही नहीं, बल्कि संबंधित सरकारी विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और अन्य जिम्मेदार एजेंसियों को ऐसे व्यावसायिक परिसरों की समय-समय पर जांच करनी चाहिए। शौचालयों की नियमित सफाई, रख-रखाव सुनिश्चित करना अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि संक्रमण और बीमारियों के खतरे से बचा जा सके।

अब आवश्यकता है कि निंबार्क पीठ प्रशासन इस ओर गंभीरता से ध्यान दे, तत्काल सफाई और मरम्मत की व्यवस्था करे और भविष्य में नियमित निगरानी तंत्र स्थापित करे। साथ ही, प्रशासनिक विभाग भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सख्त निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई करें, ताकि अजमेर जैसे धार्मिक और पर्यटक शहर में स्वच्छता और जन-सुविधाओं के साथ कोई समझौता न हो।

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