तीन दशकों बाद डेमोक्रेटिक पार्टी का विघटन, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून बना
दिल्ली । (एजेंसी) हॉन्गकॉन्ग की सबसे बड़ी और प्रभावशाली लोकतंत्र-समर्थक पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी ने तीन दशकों से अधिक समय तक सक्रिय रहने के बाद खुद को भंग करने का फैसला कर लिया है। पार्टी की विशेष आम बैठक में करीब 97 प्रतिशत सदस्यों ने पार्टी को समाप्त करने के पक्ष में मतदान किया। पार्टी अध्यक्ष लो किन-हेई ने इसे “बेहद कठिन लेकिन मजबूरी भरा निर्णय” बताते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में पार्टी का अस्तित्व बनाए रखना संभव नहीं रह गया था।
1994 में स्थापित डेमोक्रेटिक पार्टी लंबे समय तक हॉन्गकॉन्ग में सार्वभौमिक मताधिकार, लोकतांत्रिक सुधार और नागरिक अधिकारों की सबसे मजबूत आवाज रही। पार्टी ने वर्षों तक विधान परिषद और जिला परिषदों में प्रतिनिधित्व किया और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को मुखरता से उठाया। इसके प्रमुख नेताओं में मार्टिन ली, जिन्हें “हॉन्गकॉन्ग के लोकतंत्र का जनक” कहा जाता है, एमिली लाउ और अन्य अनुभवी जनप्रतिनिधि शामिल रहे हैं।
हालांकि 2020 में चीन द्वारा लागू राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के बाद पार्टी की गतिविधियां लगातार सीमित होती चली गईं। इस कानून के तहत अलगाववाद, सत्ता विरोध और विदेशी ताकतों से साठगांठ जैसे अपराधों की व्यापक परिभाषा तय की गई, जिसके चलते कई लोकतंत्र-समर्थक नेताओं की गिरफ्तारी हुई और अनेक पर मुकदमे दर्ज किए गए। इसके साथ ही चुनावी व्यवस्था में बदलाव कर केवल “देशभक्त” उम्मीदवारों को ही चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई, जिससे विपक्षी दल लगभग चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो गए।
डेमोक्रेटिक पार्टी का कहना है कि बढ़ते राजनीतिक दबाव, कानूनी जोखिम और सीमित राजनीतिक स्थान के कारण सक्रिय राजनीति जारी रखना असंभव हो गया था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पार्टी का विघटन हॉन्गकॉन्ग में स्वतंत्र विपक्ष और लोकतांत्रिक राजनीति के सिमटने का बड़ा संकेत है। यह फैसला केवल एक राजनीतिक दल के अंत की नहीं, बल्कि हॉन्गकॉन्ग की लोकतांत्रिक पहचान के कमजोर पड़ने की कहानी भी कहता है।
