
रक्षाबंधन पर केंद्रीय जेल के बाहर उमड़ा बहनों का सैलाब, कोई भाई की कलाई पर बांध रही राखी तो कोई उसकी सलामती की दुआ लेकर पहुंची; जेल परिसर में दिनभर रहा भावनाओं का सैलाब
रीवा। बाहर आसमान बरस रहा था और भीतर भावनाएं उमड़ रही थीं। रक्षाबंधन के पर्व पर रीवा केंद्रीय जेल का माहौल किसी आम दिन से बिल्कुल अलग नजर आया। सुबह से लगातार हो रही बारिश के बावजूद बहनों के कदम नहीं रुके। दूर-दराज से महिलाएं अपने भाइयों से मिलने जेल पहुंचती रहीं। किसी के हाथ में राखी और पूजा की थाली थी तो किसी की आंखों में वर्षों की मुलाकात की बेचैनी। जेल की ऊंची दीवारों के बीच मनाया गया यह रक्षाबंधन भाई-बहन के उस रिश्ते की तस्वीर बन गया, जिसे परिस्थितियां भी कमजोर नहीं कर पातीं।सुबह होते ही केंद्रीय जेल के बाहर बहनों की आवाजाही शुरू हो गई थी। बारिश तेज होती रही, लेकिन मुलाकात के लिए पहुंचने वालों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ती गई। सुबह से ही बड़ी संख्या में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए जेल पहुंचीं। जेल प्रशासन ने भी पर्व को देखते हुए मुलाकात और सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए थे।
कलाई पर राखी, आंखों में आंसू
जेल परिसर में भाई-बहन के मिलन के दृश्य बेहद भावुक करने वाले रहे। लंबे समय बाद सामने बैठे भाई को देखते ही कई बहनों की आंखें नम हो गईं। किसी ने भाई की कलाई पर राखी बांधी, किसी ने मिठाई खिलाई और किसी ने बस कुछ पल सामने बैठकर मन की बात कह दी।इन मुलाकातों में खुशी भी थी और दर्द भी। बहनों की जुबान पर भाइयों की सलामती की दुआ थी और दिल में यही उम्मीद कि परिस्थितियां जल्द बदलेंगी और उनका भाई एक दिन वापस घर लौटेगा।रक्षाबंधन का त्योहार यहां केवल राखी बांधने की रस्म नहीं रहा, बल्कि अपनों से दूर रह रहे भाई-बहनों के बीच रिश्ते को फिर से महसूस करने का भावुक अवसर बन गया।
बारिश बनी परीक्षा, लेकिन रिश्ते के आगे हार गई
रीवा में भारी बारिश के बीच जेल पहुंचना आसान नहीं था। इसके बावजूद बहनों ने मौसम की परवाह नहीं की। कई महिलाएं दूर-दराज के इलाकों से सफर करके पहुंचीं। उनके लिए रास्ते की मुश्किलें उस रिश्ते से छोटी थीं, जिसे निभाने के लिए वे जेल तक आई थीं।एक बहन के लिए भाई की कलाई पर राखी बांधना महज एक परंपरा नहीं, बल्कि यह भरोसा है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, रिश्ते की डोर नहीं टूटती।
जेल प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
रक्षाबंधन को देखते हुए जेल प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के साथ बहनों की मुलाकात के लिए विशेष प्रबंध किए गए। जेल प्रशासन के अनुसार दिनभर बड़ी संख्या में बहनों के पहुंचने की संभावना रही।जेल अधीक्षक एसके उपाध्याय के अनुसार, सुबह के समय ही हजारों बहनें अपने भाइयों से मिलने पहुंच चुकी थीं और दोपहर तक यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद थी।
इन दीवारों के बीच रिश्तों की गर्माहट
रीवा केंद्रीय जेल में रक्षाबंधन का यह दृश्य अपने आप में एक बड़ा संदेश छोड़ गया। एक तरफ जेल की दीवारें थीं, दूसरी तरफ उन दीवारों को पार करती रिश्तों की भावनाएं। बाहर बारिश थी, लेकिन बहनों के हाथों में बंधी राखियों में उम्मीद थी।किसी भाई की कलाई पर बंधा एक छोटा-सा धागा उस दिन बहुत कुछ कह रहा था—दूरी हो सकती है, सजा हो सकती है, परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन भाई-बहन का रिश्ता अपनी जगह कायम रहता है।रक्षाबंधन पर रीवा केंद्रीय जेल में उमड़ी बहनों की भीड़ ने एक बार फिर साबित किया कि रिश्तों की मजबूती मौसम, दूरी और हालात की मोहताज नहीं होती।
