SIR पर हंगामा ? : कांग्रेस की राजनीति बनाम बीजेपी की पारदर्शिता

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कांग्रेस का SIR पर हमला: बीजेपी से बचाव या पारदर्शिता से डर—फ़ैसला जनता का

देश में आज एक ही सवाल गूंज रहा है—वोटर सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर कांग्रेस इतना आक्रामक विरोध क्यों कर रही है? जब केंद्र की बीजेपी सरकार वोटर लिस्ट को शुद्ध, पारदर्शी और राष्ट्रहित में मजबूत बनाने की पहल कर रही है, तब कांग्रेस इसे लोकतंत्र पर हमला बताकर भ्रम फैलाने में क्यों जुटी है? क्या यह सचमुच जनता के अधिकारों की लड़ाई है या राजनीतिक मजबूरी?

कांग्रेस लगभग 70 वर्षों तक सत्ता के केंद्र में रही। 2014 से पहले केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और चुनाव आयोग समेत सभी संवैधानिक संस्थाएं उस दौर में भी काम कर रही थीं। यदि आज देश में फर्जी वोटर आईडी, एक ही घर में कई नाम, अवैध घुसपैठियों के दस्तावेज और दोहरे रिकॉर्ड सामने आ रहे हैं, तो यह सब रातों-रात कैसे पैदा हो गया? क्या कांग्रेस के लंबे शासनकाल में कभी वोटर रिकॉर्ड की ईमानदार और व्यापक समीक्षा की गई? यह सवाल कांग्रेस के लिए असहज जरूर है, लेकिन उसे जनता को जवाब देना चाहिए ।

हकीकत यह है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रेस को प्रजेंटेशन में बताया था कि कैसे  एक ही परिवार और एक ही पते पर कई वोटर आईडी बने हुए हैं । आज जब बीजेपी सरकार उन्हीं खामियों को दूर कर रही है, तो कांग्रेस इसे “वोट चोरी” का नाम देकर केंद्र सरकार ,चुनाव आयोग को बदनाम कर  देश की जनता को गुमराह कर रही है ? 

राज्यों में सामने आए मामलों ने कांग्रेस शासन की कार्यशैली पर और भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राजस्थान में कांग्रेस सरकार के दौरान निजी एजेंसियों को आधार और अन्य पहचान पत्र बनाने के ठेके खुलेआम दिए गए। अजमेर के ADA में एक ई-मित्र संचालक द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों से सांठगांठ कर बिना अनुमति के परिसर में ही आधार कार्ड बनाने का सिस्टम लगा रखा था मामला उजागर हुआ, कुछ पत्र चले लेकिन उस समय की कांग्रेस सरकार ने पूरे प्रकरण को दबा दिया। इसी तरह दरगाह क्षेत्र में अवैध दस्तावेज बनवाने के आरोपों पर भी आंखें मूंद ली गईं। यदि तब गहलोत सरकार सख्त कार्रवाई करती , तो अजमेर इस संकट से क्यों जूझ रहा होता?

आज सुरक्षा एजेंसियां अजमेर, दिल्ली सहित कई शहरों से ऐसे लोगों को पकड़ रही हैं, जो फर्जी वोटर आईडी, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के दम पर देश में रह रहे थे। इनमें कुछ आतंकी नेटवर्क से जुड़े पाए गए, तो कुछ को अवैध मजदूरी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। भेष बदलकर भिखारी बने जासूसों तक के खुलासे हुए। सवाल यह है कि जब यह सब कांग्रेस काल में पनप रहा था, तब देश की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस सरकार ने सख्त कदम क्यों नहीं उठाए?

आज बीजेपी सरकार ब्रिटिश काल की जटिल और अपारदर्शी व्यवस्थाओं से देश को मुक्त कर एक साफ, पारदर्शी और जवाबदेह सिस्टम बनाना चाहती है। SIR उसी दिशा में उठाया गया कदम है, ताकि हर नागरिक की पहचान स्पष्ट हो, योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और राष्ट्र की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। यहां जाति और धर्म नहीं, बल्कि भारत और मानवता सर्वोपरि है।

यदि कांग्रेस को जनता की चिंता है, तो उसे बताना चाहिए कि वह पारदर्शिता से क्यों डर रही है। सरकार ने नाम सुधारने और आपत्ति दर्ज कराने के लिए पूरा समय और प्रक्रिया दी है। जब कांग्रेस स्वयं हर वार्ड में कैंप लगाकर वोटर आईडी के लिए लोगों को जागरूक कर रही है, तो फिर यह आरोप कैसे सही है कि सरकार जबरन नाम काट रही है?

सच्चाई यह है कि वर्षों की अनदेखी, वोट बैंक की राजनीति और भ्रष्टाचार ने देश को एक नासूर जख्म दिया जिसे भरने में समय लगेगा । आज बीजेपी सरकार उसे ठीक करने की कोशिश कर रही है—भले ही इसके लिए उसे राजनीतिक बदनामी ही क्यों न झेलनी पड़ रही हो , अब फैसला जनता को करना है—कांग्रेस की डर की राजनीति या बीजेपी की पारदर्शिता की पहल , SIR पर अंतिम निर्णय भी जनता ही देगी। जो आगे आने वाले चुनावों में सभी के सामने होगा ।

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