“बैंक ऑफ बड़ौदा” के डेबिट कार्ड पर “दुर्घटना बीमा” का दावा ? दो साल से परिजन भटक रहे – बैंक मौन,अधिकारी पर बन सकता है जेल जाने का मामला

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अजमेर के वैशाली नगर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में लापरवाही और सेवा कमी का गंभीर मामला उजागर हुआ है। वैशाली नगर निवासी मृतक चिराग के परिजनों ने बताया कि उनके 22 वर्षीय पुत्र चिराग की 7अक्टूबर,2023,को बजरी से भरे डंपर के निजी दबकर मृत्यु हो गई थी । बैंक ऑफ बड़ौदा में चिराग का स्वयं का अकाउंट था । जिस पर बैंक द्वारा जारी किए गए RuPay डेबिट कार्ड पर दुर्घटना बीमा कवर के तहत ₹10 लाख की बीमा राशि मिलनी थी। लेकिन कार्डधारक की मृत्यु के बाद परिजनों ने सभी जरूरी दस्तावेज़ और ट्रांजेक्शन डिटेल समय पर जमा कर दिए, बावजूद इसके दो साल बाद भी परिवार को एक पैसा तक नहीं मिला।

परिजनों का आरोप

“बैंक ने सभी कागज़ात लेने के बाद सिर्फ आश्वासन दिया। लेकिन न कोई लिखित जवाब मिला और न ही बीमा कंपनी से समन्वय कर क्लेम दिलाने की जिम्मेदारी निभाई। बैंक प्रबंधन सिर्फ टालमटोल कर रहा है।”

बैंक की जिम्मेदारी पर सवाल

बैंक ऑफ बड़ौदा का RuPay Select Debit Card स्पष्ट रूप से Accidental Insurance Cover ₹10 लाख का वादा करता है। NPCI और Tata AIG बीमा कंपनी के नियमों के अनुसार, दावे का निपटान 30 दिन में होना अनिवार्य है। लेकिन यहाँ दो साल से मामला लटका कर रखा गया है।

कानूनन अपराध

कानूनी विशेषज्ञ एडवोकेट अनुज माथुर के अनुसार –

ग्राहक से वादा करके बीमा लाभ न दिलाना धोखाधड़ी (Cheating under IPC 415/420) की श्रेणी में आता है।

उपभोक्ता अधिकारों की अनदेखी करना सेवा में कमी (Deficiency of Service under Consumer Protection Act, 2019) है, जिस पर जुर्माना और जिम्मेदार अधिकारी को जेल तक की सजा हो सकती है।

RBI के बैंकिंग नियमों का उल्लंघन करना भी गंभीर दंडनीय अपराध है।

“अगर राष्ट्रीयकृत बैंक ही जनता को धोखा देंगे तो आम आदमी कहाँ न्याय पाएगा? ₹10 लाख का बीमा दिखाकर ग्राहकों को कार्ड दिलवाया जाता है, लेकिन वक़्त आने पर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है।”

RBI और प्रशासन से गुहार

पीड़ित परिवार ने अब इस मामले को RBI, उपभोक्ता फोरम और कोर्ट तक ले जाने का निर्णय लिया है।

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