जयपुर। सीकर राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 75 मीटर तक बने अवैध निर्माणों पर अब बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। जिला कलेक्टर, सीकर द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह कदम सीधे निर्देशों के अनुपालन में उठाया जा रहा है। आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि डी.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 24826/2025 (हिम्मत सिंह गहलोत बनाम राज्य व अन्य) में न्यायालय ने “बिल्डिंग लाइन” और “कंट्रोल लाइन” के भीतर किए गए सभी निर्माणों को अवैध मानते हुए उन्हें तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं।
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी माना कि हाईवे के बेहद पास बने होटल, ढाबे और अन्य व्यावसायिक निर्माण सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रहे हैं और भविष्य में सड़क विस्तार कार्यों में बाधा उत्पन्न करते हैं। इसी कारण कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए हाईवे के केंद्र बिंदु से लगभग 75 मीटर तक के दायरे को अतिक्रमण मुक्त रखने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन द्वारा जारी पत्र में सभी संबंधित अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है, जिससे यह साफ हो गया है कि अब केवल चेतावनी नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी। यह कार्रवाई National Highways Act, 1956 और सड़क परिवहन मंत्रालय की गाइडलाइंस के तहत की जा रही है।
सरकार की मंशा इस कदम से हाईवे को सुरक्षित, व्यवस्थित और भविष्य के लिए तैयार करना है। इससे न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि फोरलेन और सिक्सलेन जैसे विस्तार कार्य भी बिना बाधा के पूरे हो सकेंगे। आगे की योजना में प्रशासन द्वारा सख्त निगरानी, नए निर्माणों पर नियंत्रण और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश और प्रशासनिक सख्ती के चलते अब हाईवे किनारे अवैध निर्माण बच पाना मुश्किल है—आने वाले दिनों में प्रदेशभर में ऐसे बड़े एक्शन देखने को मिल सकते हैं।

