सोशल मीडिया की आग में झुलसा सौहार्द, निजी कार्यक्रम तक पहुंचा विरोध
अजमेर । अजमेर से हाल ही में सामने आया एक घटनाक्रम समाज के लिए गंभीर सोच का विषय बन गया है। जो अब देश भर के समाचार चैनलों के लिए (TRP ) बन गया ।
अजमेर दक्षिण के जादूघर क्षेत्र में नवरात्रि के अवसर पर माता के जागरण का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में स्थानीय गायक कलाकार जॉन अजमेरी को भजन प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया। जॉन अजमेरी पिछले 25 वर्षों से अजमेर में भजन और कव्वाली गायन के लिए जाने जाते हैं और विभिन्न मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां देते आए हैं।विवाद की शुरुआत तब हुई जब जागरण के दौरान उपस्थित एक महिला, जो आयोजक परिवार से जुड़ी थीं और दूसरे धर्म से संबंध रखती हैं, ने जॉन अजमेरी से एक कव्वाली गाने का अनुरोध किया। इस पर कलाकार ने एक कव्वाली प्रस्तुत कर दी। कार्यक्रम में उपस्थित किसी व्यक्ति ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। अगले दिन यह वीडियो कुछ हिंदूवादी संगठनों तक पहुंचा, जिन्होंने इसे धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध और राजनीति से प्रेरित घटना मान लिया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब अगले दिन शास्त्री नगर क्षेत्र में एक निजी पारिवारिक भजन संध्या कार्यक्रम के दौरान, जहां जॉन अजमेरी को परिवार ने आमंत्रित किया था । वहाँ संगठनों के कार्यकर्ता पहुंच गए और विरोध शुरू कर दिया । अचानक भीड़ देख वहां अफरा तफरी मच गई कार्यक्रम के दौरान परिवार के लोगों ने जॉन अजमेरी को भीड़ से बचाकर एक कमरे में सुरक्षित किया।
इसी दौरान वहां मौजूद भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा अध्यक्ष भारती श्रीवास्तव, जिन्हें निजी तौर पर कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, ने स्थिति को बिगड़ता देख शांत करवाने का प्रयास किया। उन्होंने समझाइश करते हुए संगठन के कार्यकर्ताओं को कहा कि यदि किसी को आपत्ति है, तो वह उस स्थान पर जाकर बात करें जहां जागरण हुआ था, न कि किसी अन्य परिवार के निजी कार्यक्रम में आकर माहौल खराब करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न तो वे उस जागरण में शामिल थीं और न ही इस परिवार का उससे कोई संबंध है।
इसके बावजूद, कुछ कार्यकर्ताओं ने भारती श्रीवास्तव को ही निशाना बनाते हुए उन्हें जॉन अजमेरी का समर्थक बताया और माफी मांगने का दबाव बनाया। यहां तक कि उनके पुतला दहन की धमकियां भी दी गईं। इस पर भारती श्रीवास्तव ने कहा कि यदि कार्यकर्ताओं को लगता है कि उनसे गलती हुई है, तो वे नवरात्रि के दौरान माफी मांगने को भी तैयार हैं, लेकिन यह संदेश जाएगा कि “कलयुग में एक मां को उसके ही बेटे झुकाने को मजबूर कर रहे हैं।”
इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें एक ओर भारती श्रीवास्तव शांति बनाए रखने की अपील करती नजर आती हैं
वीडियो लिंक : भारती श्रीवास्तव और कार्यकर्ता
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वहीं दूसरी ओर कुछ लोग उन्हें अपशब्द कहते और विरोध करते दिखाई देते हैं। वीडियो में एक व्यक्ति खुद को पत्रकार बताते हुए भी दबाव बनाता हुआ नजर आता है।
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अब सवाल यह उठता है कि क्या एक जनप्रतिनिधि द्वारा मौके पर शांति स्थापित करने का प्रयास करना गलत है? या फिर समाज में बढ़ती भीड़तंत्र की प्रवृत्ति हर स्थिति में विवेक और संवाद को दबा रही है ?
अजमेर के वरिष्ठ पत्रकार ने अपने ब्लॉग “हस्तक्षेप” में इस बात को कुछ इस तरह जाहिर किया – *”चाहे ख़ुदा या राम का ही नाम लीजिए, बंदों से पूंछ कर ही फिर यह काम कीजिए”*
इस मामले में संगठन के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेत्री द्रोपदी कोली का भी पुतला जलाया इसके बाद द्रोपदी कोली की ओर से मीडिया को दिए गए बयान सामने आए । जिसमें वह अपनी बात जनता के सामने रख रही हैं कि वह सिर्फ वहां जागरण में एक आम इंसान की तरह गई थी भजन सुनने ना की किसी अतिथि के रूप में ।
वीडियो लिंक :- द्रोपदी कोली मिडिया में बयान
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यह घटना पहली नहीं है जब अजमेर में बिना पूरी जानकारी के संगठित विरोध हुआ हो। इससे पहले भी कई बार ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं, जहां बिना तथ्यों की पुष्टि किए भीड़ ने माहौल को बिगाड़ा है। यदि इस प्रवृत्ति पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो भविष्य में कानून, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका ही प्रश्नों के घेरे में आ जाएगी।
युवाओं और सामाजिक संगठनों को यह समझना होगा कि हर वायरल वीडियो सच नहीं होता और हर मुद्दा विरोध का विषय नहीं होता। कई बार ऐसे मामलों के पीछे राजनीतिक या सामाजिक रणनीतियां भी हो सकती हैं, जिनका उद्देश्य उभरते नेतृत्व को कमजोर करना होता है।
वर्तमान में अजमेर की राजनीति में भारती श्रीवास्तव और द्रोपदी कोली जैसे चेहरे तेजी से उभरकर सामने आए हैं, जिन्हें जनता भविष्य के नेतृत्व के रूप में देख रही है। ऐसे में उनके समर्थकों के मन में यह भी शंका है कि इन उभरते नेताओं को इनके राजनैतिक प्रतिद्वंद्वियों के द्वारा कमजोर करने का प्रयास तो नहीं हैं ?
जनता का सरकार और प्रशासन से सीधा सवाल है—यदि हर निर्णय भीड़ ही करेगी, तो फिर जनप्रतिनिधियों और कानून व्यवस्था की आवश्यकता क्या रह जाएगी? लोकतंत्र की मजबूती भीड़ के दबाव में नहीं, बल्कि संवाद, संयम और कानून के पालन में होती है।
अजमेर को शांत, सौहार्दपूर्ण और जागरूक बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। यह समय है समझदारी दिखाने का, न कि उन्माद में बहने का।
