शीर्षक: माँ कात्यायनी की आराधना से मिलता है साहस, शक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

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!! माँ कात्यायनी !!

नवरात्रि के दौरान देवी कात्यायनी की पूजा का छठा दिन

नाम— कात्यायनी
मनपसंद फूल — लाल फूल या लाल गुलाबj
अर्थ — कात्यायन के आश्रम में जन्मी।

छठी या षष्ठी देवी है कात्यायनी। कात्यायनी का अर्थ है “कात्यायन के आश्रम में जन्मी “ऋषि कात्यायन” की पुत्री” महर्षि कात्यायन ने माँ भगवती को पुत्री के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया, जिससे उनका नाम कात्यायनी पड़ा। इसके अलावा, त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) के तेज से भी इनका प्राकट्य माना जाता है। मान्यता है कि इनके पूजन से अर्थ धर्म काम और मोक्ष चारों फलो कि प्राप्ति होती हैं इसके साथ ही रोग शोक सन्ताप और भय नष्ट हो जाते हैं इस दिन श्रद्धालुगण लाल कपड़े पहनते हैं और शहद का भोग चढ़ाते हैं।

मंत्र—
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

प्रार्थना—
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

स्तुति—
ॐ या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान—
वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा आज्ञाचक्र स्थिताम् षष्ठम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम्॥

स्तोत्र—
कञ्चनाभां वराभयं पद्मधरा मुकटोज्ज्वलां।
स्मेरमुखी शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोऽस्तुते ॥ १
पटाम्बर परिधानां नानालङ्कार भूषिताम्।
सिंहस्थिताम् पद्महस्तां कात्यायनसुते नमोऽस्तुते ॥
परमानन्दमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति, कात्यायनसुते नमोऽस्तुते ॥
विश्वकर्ती, विश्वभर्ती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
विश्वाचिन्ता, विश्वातीता, कात्यायनसूते नमोऽस्तुते ॥
कां बीजा कां जपानन्दकां बीज जप तोषिते।
कां कां बीज जपदासक्ताकां कां सन्तुता ॥
कांकारहर्षिणीकां धनदाघनमासना ॥
कां बीज जपकारिणीकां बीज तप मानसा।
कां कारिणी कां मन्त्रपूजिताकां बीज धारिणी ॥
कां कीं कूंकै कः ठः छः स्वाहारुपिणी ॥

कवच—
कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी॥

आरती

!! ॐ श्री गणेशाय नमः !!

जय जय अम्बे जय कात्यायनी। जय जग माता जग की महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहावर दाती नाम पुकारा॥
कई नाम है कई धाम है। यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी। कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
हर जगह उत्सव होते रहते। हर मन्दिर में भगत है कहते॥
कत्यानी रक्षक काया की। ग्रंथि काटे मोह माया की॥
झूठे मोह से छुडाने वाली। अपना नाम जपाने वाली॥
बृहस्पतिवार को पूजा करिए। ध्यान कात्यानी का धरिये॥
हर संकट को दूर करेगी। भंडारे भरपूर करेगी॥
जो भी माँ को भक्त पुकारे। कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥

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