नई दिल्ली। (प्रेस)देश के युवाओं के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का ताज़ा संदेश नई पीढ़ी के चरित्र निर्माण और राष्ट्रीय एकता का आह्वान है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपशब्द, कटुता और नफरत किसी भी समस्या का समाधान नहीं हैं। यदि कोई युवा भटक गया है तो उसे दंडित करने के बजाय सही दिशा दिखाना समाज की जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री ने जंतर-मंतर पर हुई घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके और उनकी स्वर्गीय माताजी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग पूरे देश ने देखा। उन्होंने माना कि ऐसे व्यवहार से समाज में स्वाभाविक आक्रोश पैदा होता है, लेकिन युवावस्था और बचपन सीखने, गलती सुधारने और बेहतर इंसान बनने का अवसर भी देते हैं। इसलिए भटके हुए युवाओं को अदालतों और सामाजिक बहिष्कार की ओर धकेलने के बजाय उन्हें अपनाकर राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना अधिक आवश्यक है।
उन्होंने देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर भारत के विकास, नवाचार, शिक्षा, रोजगार, विज्ञान, पर्यावरण और सामाजिक सद्भाव जैसे क्षेत्रों में अपनी ऊर्जा लगाएँ। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और अब समय है कि देश का हर युवा भी अपने सपनों को साकार करते हुए राष्ट्र की प्रगति का भागीदार बने।
प्रधानमंत्री का संदेश आज के डिजिटल दौर में विशेष महत्व रखता है, जहाँ सोशल मीडिया पर बढ़ती कटुता और भाषा का स्तर कई बार समाज में विभाजन पैदा करता है। ऐसे समय में उनका यह संदेश युवाओं को संयम, संवाद और सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करता है।
संदेश स्पष्ट है— “अपशब्द नहीं, संस्कार चुनें। विरोध नहीं, संवाद चुनें। विभाजन नहीं, विकास चुनें। आइए, एकजुट होकर भारत के लिए कार्य करें।”
यह संदेश केवल युवाओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक ऐसी प्रेरणा है जो आने वाले भारत की दिशा तय कर सकती है।
