बजरी डंपरों का कहर जारी: भीलवाड़ा में युवक की मौत के बाद अजमेर का दर्द फिर हुआ ताजा

Spread the love

“माताएं रोती रहीं” — सरकार से मदद की आस”

अजमेर/भीलवाड़ा(एजेंसी) | भीलवाड़ा जिले में बजरी से भरे बेकाबू डंपर ने बुधवार देर रात टीम दोस्तों को कुचल दिया। सदर थाना क्षेत्र के अगरपुरा गांव के पास तेज रफ्तार डंपर ने बाइक सवार तीन दोस्तों को कुचल दिया। हादसा इतना भीषण था कि किशन सिंह राणावत की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि नरेंद्र सिंह और करण सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर अस्पताल मोर्चरी के बाहर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि बजरी माफियाओं के डंपर लगातार बेलगाम दौड़ रहे हैं और प्रशासन कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहा है।

अजमेर दैनिक नवज्योति में प्रकाशित खबर:-

भीलवाड़ा की इस ताजा घटना ने अजमेर पुष्कर घाटी ( 7 अक्टूबर ,2023 )में बेलगाम दौड़ रहे बजरी डंपर के उस दर्दनाक हादसे की याद फिर ताजा कर दी, जिसने तीन मांओं के चिराग बुझा दिए,बेसहारा बना उनकी जिंदगी उजाड़ दी थी। हादसे में बजरी डंपर के नीचे दबने से दो युवकों चिराग और देवेन्द्र (नर्सिंग स्टूडेंट) की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि तीसरा युवक गजेंद्र करीब डेढ़ साल तक कोमा में जिंदगी और मौत से लड़ता रहा और बाद में उसकी भी मौत हो गई।

खबर वन न्यूज में “माताएं रोती रहीं” शीर्षक से प्रकाशित खबर में इन तीनों युवकों के परिवार आज भी बदहाली में जीवन गुजार रहे हैं। मृतक अपने परिवार के इकलौते बेटे थे।  परिवार में पिता पहले ही नहीं थे अब इनका  घर चलाने वाला दूसरा सदस्य नहीं बचा। हादसे के बाद इन घरों में सिर्फ माताएं अकेली रह गईं, जो आज भी न्याय, सुरक्षा और मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठी हैं।

खबर पढ़ें:

माताएं पूर्व में तत्कालीन जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को कई बार व्यक्तिगत और लिखित सरकार और प्रशासन से सहायता और कारवाई की गुहार लगाई, लेकिन आज तक किसी प्रकार का स्थायी मुआवजा या सुरक्षा इन महिलाओं को नहीं मिल सकी। पीड़ित माताओं की ओर से मुख्यमंत्री राजस्थान और अजमेर उत्तर स्थानीय विधायक वासुदेव देवनानी (पदस्थ विधानसभा अध्यक्ष) को भी पत्र लिखे गए । जो अजमेर उत्तर क्षेत्र के विधायक होने के साथ वर्तमान में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष भी हैं। पत्र में महिलाओं की सुरक्षा, आर्थिक सहायता और परिवारों के पुनर्वास की मांग की गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई संपर्क इन माताओं से नही किया गया । माताओं को आंखों से बहते आंसुओं की बूंदों के साथ इंतजार है कब उनकी पीढ़ा कोई सुनेगा।

जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवारों में से एक महिला गंभीर बीमारी से जूझ रही है और डायलिसिस पर है। परिवार में देखभाल करने वाला भी कोई नहीं बचा। इसकी सूचना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों  को भी भेजी जा चुकी है।

खबर वन न्यूज ने इस मानवीय मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस खबर को गंभीरता से पढ़कर पीड़ित परिवारों से तुरंत संपर्क किया जाए और मृतकों के परिजनों को तत्काल उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। साथ ही अंतिम सरकारी सहायता मिलने तक स्थानीय विधायक अपने विधायक निधि अथवा राहत कोष से प्रत्येक पीड़ित परिवार को कम से कम 10  लाख रुपये की तत्काल सहायता राशि उपलब्ध करवाएं, ताकि बेसहारा माताओं को कुछ राहत मिल सके। और वह अब तक का अपना कर्ज चुका सकें ।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बजरी से भरे ओवरलोड और तेज रफ्तार डंपरों पर सख्ती नहीं होने से लगातार निर्दोष लोग मौत का शिकार हो रहे हैं। हादसों के बाद कुछ दिनों तक शोर जरूर उठता है, लेकिन पीड़ित परिवारों की सुध लेने वाला ना कोई संगठन,संघ,संस्था,मानवाधिकार,महिला आयोग ,बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का दम भरने वाले ,महिला सुरक्षा,महिला मोर्चे ,राजनीतिक पार्टियां भी तक इन महिलाओं को हक दिलाने क्यों आगे नहीं दिखाई दे रही यह समाज के लिए गहराई से विचार करने की बात है आज यह माताएं तो कल कोई और …?

इसे भी पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *