किडनी फेलियर और संक्रमण की आशंका, 4 महिलाओं की हालत गंभीर; जयपुर से विशेषज्ञ टीम पहुंची, जांच शुरू
कोटा: (मीडिया) कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सीजेरियन ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं की लगातार बिगड़ती हालत ने पूरे चिकित्सा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले 48 घंटों में दूसरी प्रसूता की मौत होने के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ। मृतकों में पायल और ज्योति नाम से पहचान सामने आई है, जबकि चार अन्य महिलाओं की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।
अस्पताल सूत्रों और आधिकारिक जानकारी के अनुसार गायनिक वार्ड में सीजेरियन डिलीवरी के बाद कुल छह महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। मरीजों में पेशाब रुकने, किडनी फेल होने और गंभीर संक्रमण जैसे लक्षण सामने आए। पहली प्रसूता पायल की 5 मई को मौत हुई थी, जबकि गुरुवार सुबह ज्योति ने भी उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा था, लेकिन हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। मृतक महिलाओं के परिजनों का कहना है कि समय पर सही उपचार और निगरानी नहीं मिलने से हालात बिगड़े। कई परिजनों ने शव लेने से भी इनकार कर दिया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अस्पताल परिसर में धरना शुरू कर दिया। कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान सरकार हरकत में आई। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को तत्काल कोटा भेजने के निर्देश दिए। रात करीब एक बजे विशेषज्ञ टीम कोटा पहुंची, जिसमें नेफ्रोलॉजी, मेडिसिन, एनेस्थीसिया और स्त्री रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक शामिल थे। टीम ने मरीजों को दी जा रही दवाओं, मेडिकल हिस्ट्री, ऑपरेशन प्रक्रिया और संक्रमण की संभावनाओं की जांच शुरू कर दी है।
वहीं ओम बिरला ने भी मामले को गंभीर बताते हुए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर मरीजों और परिजनों से मुलाकात की तथा कहा कि इलाज में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला कलेक्टर पीयूष समारिया ने बताया कि तकनीकी जांच समिति गठित की गई है, जो यह पता लगाएगी कि महिलाओं की हालत अचानक क्यों बिगड़ी। अभी तक आधिकारिक रूप से मौत का स्पष्ट कारण घोषित नहीं किया गया है, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर संक्रमण, दवा रिएक्शन या ऑपरेशन के बाद आई जटिलताओं की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही जिम्मेदारी तय होगी।
अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
प्रशासन का कहना है कि बिना मेडिकल बोर्ड और तकनीकी जांच रिपोर्ट के सीधे किसी डॉक्टर या कर्मचारी पर कार्रवाई करना संभव नहीं है। इसी कारण फिलहाल जांच पूरी होने का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि परिजनों और राजनीतिक दलों का आरोप है कि मामला दबाने की कोशिश की जा रही है और जिम्मेदारों पर तत्काल निलंबन जैसी कार्रवाई होनी चाहिए।
