नई दिल्ली, 28 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने आज एक याचिका पर फैसला सुनाया जिसमें बौद्ध समुदाय के लिए अलग “पर्सनल लॉ” लागू करने की मांग की गई थी। याचिका का तर्क था कि बौद्धों पर लागू हिन्दू पर्सनल लॉ (जैसे Hindu Marriage Act, 1955 और Hindu Succession Act, 1956) उनके धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों के खिलाफ है।
कोर्ट ने याचिका को सीधे खारिज नहीं किया, न ही कोई आदेश जारी किया कि अलग पर्सनल लॉ बनाए जाए। बल्कि, सुप्रीम कोर्ट ने मामला Law Commission of India को भेजा है ताकि वह इस मामले की समीक्षा करे और सुझाव दे कि क्या बौद्धों के लिए कानून में कोई बदलाव आवश्यक है।
इस फैसले का मतलब यह है कि फिलहाल बौद्ध समुदाय के लिए कोई नया पर्सनल लॉ नहीं बना है। कोर्ट का यह निर्णय यह दर्शाता है कि बौद्ध समुदाय के धार्मिक अधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं के संबंध में कानूनी अध्ययन और विचार आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम समुदाय के हित और संवैधानिक प्रावधानों के संतुलन को देखते हुए उठाया गया है। अगले कुछ महीनों में विधि आयोग अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप सकता है, जिसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई संभव है।
