जयपुर । राजस्थान हाईकोर्ट ने बाड़मेर जिले में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और सीमांकन को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए राज्य सरकार के निर्णय को वैध ठहराया है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पंचायतों के मुख्यालय बदलने या पुनर्गठन से याचिकाकर्ताओं के किसी भी संवैधानिक या कानूनी अधिकार का उल्लंघन नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि यह एक नीतिगत और प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं हैं।
खंडपीठ ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार द्वारा 20 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना के तहत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और सीमांकन किया गया है, जो विधिसम्मत है। वर्तमान में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया जारी है और चुनाव पहले ही देरी का सामना कर चुके हैं। ऐसे में इस चरण पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न केवल अनुचित होगा, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी प्रभावित करेगा।
हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि परिसीमन और पुनर्गठन का उद्देश्य प्रशासनिक सुविधा और बेहतर स्थानीय शासन है, न कि किसी व्यक्ति या समूह के अधिकारों का हनन। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि किसी पंचायत का मुख्यालय बदला गया है या उसकी सीमाएं पुनर्निर्धारित की गई हैं, इसे अधिकारों के उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जा सकता।
इस फैसले के साथ ही राज्य में पंचायत चुनावों के रास्ते की बाधा दूर हो गई है और अब चुनाव प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ सकेगी।
