अजमेर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विजयादशमी 2025 को नागपुर में होने वाले ऐतिहासिक समारोह में देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि होंगे। यह निर्णय संघ की ओर से बड़े सामाजिक और राष्ट्रीय संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की अगुवाई में होने वाले इस समारोह में हजारों स्वयंसेवक, देशभर से आए समाजसेवी, शिक्षाविद, धार्मिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र की हस्तियाँ और विभिन्न देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
क्यों चुने गए रामनाथ कोविंद?
संघ ने इस बार अपने शताब्दी समारोह में पूर्व राष्ट्रपति को मुख्य अतिथि बनाकर कई संकेत दिए हैं—
संवैधानिक रूप से राष्ट्रपति का पद दलगत राजनीति से ऊपर माना जाता है। कोविंद जी का चयन समारोह को राष्ट्रीय स्तर पर गरिमा और निष्पक्षता के रूप में देखा जा सकता है । वहीं कोविंद दलित समाज से आते हैं। इससे संघ ने यह संदेश दिया कि उसकी सोच सामाजिक समरसता और हर वर्ग की भागीदारी पर आधारित है।
पूर्व राष्ट्रपति को मंच पर बुलाना यह दिखाता है कि आरएसएस अब केवल संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र की मुख्यधारा का अंग है।
लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में आरएसएस को “दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ” कहकर संबोधित करने के बाद से यह समारोह और भी खास हो गया है। नागपुर का विजयादशमी मंच इस बार इतिहास रचने जा रहा है, जहाँ रामनाथ कोविंद की मौजूदगी संघ की छवि और संदेश को नई ऊँचाई देगी।
